सरकारी ड्यूटी या निजी प्रैक्टिस? गोटेगांव CHC में चिकित्सकों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल, बीएमओ की भूमिका भी जांच के घेरे मे
गोटेगांव। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र गोटेगांव में पदस्थ कुछ चिकित्सकों की कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर शिकायतें सामने आई हैं। आरोप है कि शासकीय सेवा में पदस्थ चिकित्सक निर्धारित ड्यूटी समय के दौरान शासकीय अस्पताल में मरीजों को उपलब्ध रहने के बजाय अपने सरकारी आवास अथवा अस्पताल के बाहर निजी तौर पर मरीजों का उपचार कर रहे हैं। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो यह सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं, मरीजों के अधिकार और विभागीय व्यवस्था से जुड़ा गंभीर मामला हो सकता है।
जानकारी के अनुसार डॉ. इंदल सिंह दंडोतिया के संबंध में आरोप है कि वे समीर मेडिकल हॉस्पिटल के सामने स्थित निजी क्लीनिक में मरीजों का उपचार करते हैं। वहीं डॉ. रजनी सिंह के संबंध में सरकारी आवास से निजी क्लीनिक संचालित किए जाने का आरोप लगाया गया है। हाल ही में पदस्थ हुईं डॉ. निष्ठा अग्रवाल को लेकर भी सरकारी आवास से निजी मरीजों का उपचार किए जाने की शिकायत सामने आई है। इन सभी आरोपों की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच आवश्यक है।
मामले को गंभीर बनाने वाली बात यह है कि शिकायत के संबंध में विकासखंड चिकित्सा अधिकारी शंकर सिंह धुर्वे को बीते सप्ताह जानकारी दी गई थी। इसके बाद इस सप्ताह पुनः उनसे संपर्क कर मामले की स्थिति एवं विभागीय कार्रवाई के संबंध में जानकारी लेने का प्रयास किया गया। शिकायतकर्ता पक्ष का आरोप है कि दोनों अवसरों पर स्पष्ट जानकारी देने के बजाय मामले को टालने अथवा भ्रमित करने का प्रयास किया गया।
इस संबंध में हुई बातचीत की कॉल रिकॉर्डिंग उपलब्ध होने का दावा किया गया है, जिसे आवश्यकता पड़ने पर वरिष्ठ स्वास्थ्य अधिकारियों के समक्ष प्रस्तुत किया जा सकता है।
बताया गया है कि पूर्व बातचीत के दौरान बीएमओ द्वारा यह स्वीकार किए जाने का दावा है कि शासकीय चिकित्सकों की ड्यूटी का समय सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक है, लेकिन चिकित्सक लगभग 1 बजे तक ओपीडी में रहने के बाद भोजन के लिए अपने सरकारी आवास चले जाते हैं। यदि यह कथन रिकॉर्डिंग में प्रमाणित होता है तो यह अपने आप में विभागीय जांच का विषय है कि निर्धारित ड्यूटी अवधि में चिकित्सकों की वास्तविक उपस्थिति कहां और किस कार्य में रहती है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि दोपहर 1 बजे के बाद शासकीय अस्पताल में पहुंचने वाले मरीजों को चिकित्सा सुविधा कौन उपलब्ध कराता है? यदि चिकित्सक सरकारी ड्यूटी पर हैं तो अस्पताल में उनकी उपलब्धता सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी किसकी है? और यदि वे सरकारी आवास पर रहते हैं, तो क्या उस दौरान वे सरकारी मरीजों का उपचार करते हैं या निजी मरीजों का?
शिकायतकर्ता पक्ष का यह भी आरोप है कि जब अस्पताल की कवरेज अथवा निरीक्षण के लिए कोई संवाददाता पहुंचता है, तो डॉक्टरों के भोजन के लिए घर जाने की बात सामने आती है। ऐसे में विभाग को यह स्पष्ट करना चाहिए कि क्या चिकित्सकों के दोपहर बाद अस्पताल से बाहर रहने की कोई स्वीकृत व्यवस्था है और यदि है तो उसकी अवधि, आदेश एवं वैकल्पिक चिकित्सकीय व्यवस्था क्या है।
यदि यह आरोप सही पाया जाता है कि निर्धारित शासकीय ड्यूटी के दौरान चिकित्सक निजी मरीजों का उपचार करते हैं, तो इसका सीधा प्रभाव उन ग्रामीण और गरीब मरीजों पर पड़ सकता है जो सरकारी अस्पताल में निःशुल्क या निर्धारित शासकीय स्वास्थ्य सुविधा की उम्मीद लेकर पहुंचते हैं। ऐसी स्थिति में मरीजों को निजी क्लीनिक का रुख करना पड़ सकता है और वहां उन्हें निजी उपचार शुल्क का भुगतान करना पड़ सकता है।
अब जांच इन बिंदुओं पर जरूरी
स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के लिए—
– संबंधित चिकित्सकों की निर्धारित ड्यूटी एवं रोस्टर की जांच करनी चाहिए।
– बायोमेट्रिक/उपस्थिति रजिस्टर की जांच की जानी चाहिए।
– सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक की ओपीडी एवं मरीज पंजीयन रिकॉर्ड का मिलान किया जाना चाहिए।
– दोपहर 1 बजे के बाद अस्पताल में चिकित्सकों की वास्तविक उपस्थिति की जांच की जानी चाहिए।
– सरकारी आवास से कथित निजी प्रैक्टिस की शिकायतों का स्वतंत्र सत्यापन कराया जाना चाहिए।
– संबंधित निजी क्लीनिकों में चिकित्सकों की उपस्थिति एवं निजी मरीजों के उपचार संबंधी शिकायतों की जांच की जानी चाहिए।
– बीएमओ को पूर्व में दी गई शिकायतों और उनके द्वारा की गई कार्रवाई का रिकॉर्ड मांगा जाना चाहिए।
– उपलब्ध कॉल रिकॉर्डिंग की विधिसम्मत जांच की जानी चाहिए।
– संबंधित चिकित्सकों एवं बीएमओ का लिखित पक्ष लिया जाना चाहिए।
– जांच पूरी होने तक मरीजों को दोपहर बाद भी शासकीय चिकित्सा सुविधा सुचारु रूप से उपलब्ध कराने की व्यवस्था सुनिश्चित की जानी चाहिए।
CMHO और वरिष्ठ अधिकारियों से अपेक्षा
मामला केवल कुछ चिकित्सकों की कथित निजी प्रैक्टिस तक सीमित नहीं है। यदि शिकायतें सही पाई जाती हैं तो यह सवाल भी उठता है कि जिम्मेदार निगरानी अधिकारी को जानकारी होने के बाद क्या कार्रवाई की गई और सरकारी अस्पताल की सेवाओं को निर्धारित समय तक सुचारु रखने के लिए क्या कदम उठाए गए।
इसलिए मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, नरसिंहपुर सहित स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से अपेक्षा है कि मामले को केवल मौखिक स्पष्टीकरण तक सीमित न रखते हुए रिकॉर्ड आधारित, निष्पक्ष और समयबद्ध जांच कराई जाए।
यदि आरोप निराधार हैं तो जांच के माध्यम से स्थिति स्पष्ट हो जाएगी और संबंधित चिकित्सकों को भी अनावश्यक आरोपों से राहत मिलेगी। लेकिन यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो नियमानुसार जिम्मेदार चिकित्सकों एवं संबंधित निगरानी अधिकारियों की जवाबदेही तय की जानी चाहिए।
क्योंकि सवाल किसी एक डॉक्टर या अधिकारी का नहीं, बल्कि उस मरीज का है जो सरकारी अस्पताल में इलाज की उम्मीद लेकर पहुंचता है। निर्धारित सरकारी ड्यूटी के दौरान उसे चिकित्सा सुविधा मिलना सुनिश्चित करना स्वास्थ्य विभाग की प्राथमिक ….
रामकृष्ण पटेल mbnews7
Author: Sonupatel7
सच के पहले भी और बाद भी








