जबलपुर बड़ी खेर माई बहुत प्रसिद्ध और सिद्ध मंदिर है कहते हैं यहां के बारे मे कहा जाता है देश का एकलौता पहला मंदिर है जंहा देवी माँ के साथ हनुमान जी एवं भैरव बाबा नजदीक साथ मे हैं l । इस मंदिर का इतिहास तो भव्य रहा ही है बल्कि आज यह मंदिर शहरवासियों के आस्था का मुख्य केंद्र है। चैत नवरात्र हों या फिर शारदेय नवरात्र, इन दोनों पर्व पर मंदिर में पैर रखने तक की जगह नहीं होती। लाखों श्रृद्धालुओं यहां आकर मां देवी के दर्शन करते हैं। दोनों ही नवरात्र पर यहां पर विशाल मेला भी भरता है, जिस वजह से मंदिर तक आने-जाने के लिए लोगों को एक किमी पैदल चलकर यहां आना होता है।
प्रचीन है मंदिर का इतिहास
इतिहासकार डा. आनंद सिंह राणा बताते हैं कि आदिशक्ति की 52वीं गुप्त शक्तिपीठ जबलपुर में बड़ी खेरमाई मंदिर है। देवी पुराण में इसका वर्णन है। यहां सती माता का जबड़ा गिरा था। इनकी उपासना का इतिहास अति प्राचीन है परंतु शक्तिपीठ के रूप में मंदिर निर्माण कलचुरि वंश के राजा नरसिंह देव की माता अल्हण देवी ने कराया था। कलचुरि काल के अवसान के बाद गोंडवाना साम्राज्य का उदय हुआ। सन् 1290 में कड़ा और मानिकपुर के तुर्क सूबेदार अलाउद्दीन खिलजी ने गोंडवाना साम्राज्य पर हमला कर दिया। तत्कालीन गोंड राजा मदनशाह अचानक हमले के परास्त होकर, भानतलैया स्थित खेरमाई मां की शिला के पास बैठ गए। जहां उन्हें आध्यात्मिक अनुभूति हुई, पूजा के बाद उनमें अद्भुत शक्ति का संचार हुआ और मदनशाह ने तुर्क सेना पर आक्रमण कर अलाउद्दीन खिलजी को परास्त कर खदेड़ दिया। सन् 1480 में अमानदास गोंडवाना के महाप्रतापी सम्राट बने जो राजा संग्रामशाह के नाम से प्रसिद्ध हैं।
Author: Mb News 7
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