श्रीमद् भागवत कथा के दूसरे दिन सती चरित्र का भावपूर्ण वर्णन

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✍️श्रीमद् भागवत कथा के दूसरे दिन सती चरित्र का भावपूर्ण वर्णन

👉🏻गोटेगांव – विगत दिवस कुकलाह ग्राम में श्रीमद् भागवत कथा के दूसरे दिन श्रद्धा और भक्ति का माहौल बना रहा। कथावाचक ध्रुव देव महाराज ने बताया कि किसी भी स्थान पर बिना निमंत्रण जाने से पहले इस बात का ध्यान जरूर रखना चाहिए कि जहां आप जा रहे है वहां आपका, अपने इष्ट या अपने गुरु का अपमान न हो।
कथा वाचक ध्रुव देव महाराज ने कहा कि यदि अपने गुरू,इष्ट के अपमान होने की आशंका हो तो उस स्थान पर जाना नहीं चाहिए। चाहे वह स्थान अपने जन्म दाता पिता का ही घर क्यों न हो। प्रसंगवश भागवत कथा के दौरान सती चरित्र के प्रसंग को सुनाते हुए कहा भगवान शिव की बात को नहीं मानने पर सती के पिता के घर जाने से अपमानित होने के कारण स्वयं को अग्नि में स्वाह होना पड़ा था।
भागवत कथा के मंगल मय प्रसंग, महाभारत कथा, श्रृष्टि की उत्पति, , सती चरित्र, शिव विवाह महोत्सव का प्रसंग विस्तार से सुनाया. शारणागति परिवार, जमशेदपुर द्धारा आयोजित भागवत कथा में कथावाचक ने कहा कि भागवत कथा के ये सभी प्रसंग (सृष्टि, कपिल-देवहूति, सती चरित्र, शिव विवाह, महाभारत) श्रीमद्भागवत महापुराण और अन्य शास्त्रों के अत्यंत महत्वपूर्ण और मनमोहक अंश हैं, जो जीवन, भक्ति, वैराग्य, और ईश्वर-लीला के गूढ़ रहस्यों को समझाते हैं. भागवत कथा इन सभी प्रसंगों को एक साथ जोड़कर एक मंगलमय यात्रा कराती है, जिसमें सृष्टि की उत्पत्ति (ब्रह्मा से लेकर प्रलय तक), कपिल मुनि द्वारा माता देवहूति को ज्ञान, देवी सती का आत्मदाह और शिव-विवाह का विस्तार से वर्णन होता है, जो अंततः महाभारत की ओर ले जाता है. इन कथाओं के माध्यम से उन्होंने जीवन का सार समझाया. कथावाचक ने कहा कि सती चरित्र और शिव विवाह का प्रसंग हिंदू पौराणिक कथाओं का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिसमें माता सती का अपने पिता प्रजापति दक्ष के यज्ञ में अपमानित होकर आत्मदाह करना और फिर पुनर्जन्म लेकर देवी पार्वती के रूप में शिव से विवाह करना वर्णित है, जो शिव-पार्वती विवाह के रूप में मनाया जाता है, जिसे महाशिवरात्रि के पर्व से भी जोड़ा जाता है.
👉🏻कथा के दौरान भजन-कीर्तन से वातावरण भक्तिमय हो गया और श्रद्धालुओ ने जयकारो के साथ कथा का आनंद लिया। आयोजन समिति के संपर्क सूत्र अनिल पटेल ,आशीष नेमा ऋषिराज पटेल,, अमित नेमा ,सहित अन्य श्रद्धालुओ की उपस्थिति रही। कथा के अंत में आरती कर सभी के कल्याण और सुख-समृद्धि की कामना की गई।

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Author: Sonupatel7

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