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शहर में फैल रहा कठोंदा का ‘जहर’: मेंटेनेंस के नाम पर खानापूर्ति, बिना FGD सिस्टम उगल रहा काला धुआं

जबलपुर (MB News 7) : संस्कारधानी की आबो-हवा में इन दिनों ‘कठोंदा प्लांट’ से निकलने वाला काला धुआं जहर घोल रहा है। मेंटेनेंस के बाद कचरे से बिजली बनाने वाले इस प्लांट ने उत्पादन के नए रिकॉर्ड तो बना लिए, लेकिन शहरवासियों की सेहत को ताक पर रख दिया है। जानकारों का कहना है कि प्लांट से निकलने वाला दमघोंटू धुआं सीधे लोगों के फेफड़ों पर हमला कर रहा है।
### **साढ़े 4 करोड़ की बिजली बनी, पर सांसें हुईं महंगी**
हाल ही में हुए मेंटेनेंस के बाद कठोंदा स्थित ‘वेस्ट टू एनर्जी प्लांट’ ने एक महीने के भीतर करीब **साढ़े 4 करोड़ रुपये** की बिजली पैदा कर ली है। लेकिन इस मुनाफे के पीछे एक काला सच छिपा है। प्लांट की चिमनी से 24 घंटे निकलने वाला घना काला धुआं पूरे शहर में फैल रहा है।
### **पैसा बचाने के चक्कर में FGD सिस्टम से खिलवाड़?**
आरोप है कि कंपनी ने मुनाफा कमाने और अधिक उत्पादन के लालच में **FGD (Flue-gas Desulfurization)** सिस्टम को नजरअंदाज कर दिया है। मेंटेनेंस के दौरान यह दावा किया गया था कि खराब हो चुके FGD सिस्टम को बदला जाएगा, लेकिन सूत्रों की मानें तो ऐसा नहीं हुआ। पुराना और खराब सिस्टम ही लगा रहा, जिससे हानिकारक गैसें बिना फिल्टर हुए सीधे वातावरण में छोड़ी जा रही हैं
## **FGD सिस्टम क्या है और यह कैसे काम करता है?**
यदि आप सोच रहे हैं कि एक फिल्टर जैसी मशीन शहर को जहरीली गैसों से कैसे बचा सकती है, तो **FGD (Flue-gas Desulfurization)** को समझना जरूरी है।
### **FGD कैसे काम करता है?**
FGD एक ऐसी तकनीक है जिसका उपयोग बिजली संयंत्रों (Power Plants) से निकलने वाली ‘फ्लू गैसों’ से **सल्फर डाइऑक्साइड ($SO_2$)** को हटाने के लिए किया जाता है।
1. **स्क्रेबिंग प्रक्रिया: चिमनी से धुआं बाहर निकलने से पहले उसे एक ‘एब्जॉर्बर टॉवर’ से गुजारा जाता है।
2. **कैमिकल रिएक्शन:** यहाँ चूने (Lime) या चूना पत्थर (Limestone) के घोल की फुहार छोड़ी जाती है।
3. **गैस का शुद्धिकरण:** जब जहरीला धुआं इस घोल के संपर्क में आता है, तो सल्फर डाइऑक्साइड चूने के साथ क्रिया करके ‘जिप्सम’ में बदल जाता है और भारी होकर नीचे बैठ जाता है। इसके बाद साफ गैस चिमनी से बाहर निकलती है।
# हानिकारक गैसें कैसे हटाता है FGD?
कचरा जलने से न केवल कार्बन, बल्कि भारी मात्रा में सल्फर, नाइट्रोजन ऑक्साइड और पार्टिकुलेट मैटर (PM 2.5/10) निकलते हैं।
* **सल्फर हटाना:** FGD सिस्टम 90-95% तक सल्फर डाइऑक्साइड को सोख लेता है।
एसिड रेन से बचाव: यदि सल्फर हवा में मिलता है, तो यह नमी के साथ मिलकर सल्फ्यूरिक एसिड बनाता है, जो **अम्लीय वर्षा (Acid Rain)** का कारण बनता है।
* **फेफड़ों की सुरक्षा:* बिना FGD के निकलने वाला धुआं अस्थमा, ब्रोंकाइटिस और हृदय रोगों का मुख्य कारण है।
MBnews7 का सवाल: जिम्मेदारी किसकी?
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की चुप्पी और कंपनी की लापरवाही शहर के भविष्य पर भारी पड़ सकती है। मेंटेनेंस के नाम पर केवल ‘बिजली उत्पादन’ बढ़ाना और ‘सुरक्षा मानकों’ को भूल जाना, क्या प्रशासन किसी बड़ी त्रासदी का इंतजार कर रहा है?
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