मध्य भारत न्यूज़ गोटेगाँव
✍️कथा व्यास श्री रामनरेश शास्त्री ने भागवत कथा में श्रीकृष्ण के विवाह प्रेम की कथा का सारांश समझाया
✍️रुक्मिणी विवाह प्रसंग पौराणिक कथा है जिसमें उन्होंने कहा विदर्भ राजकुमारी रुक्मिणी ने श्रीकृष्ण को अपना पति मान लिया था ,और शिशुपाल से होने वाले अपने विवाह को रोकने के लिए श्रीकृष्ण को संदेश भेजा, जिसके बाद श्रीकृष्ण ने उनका हरण कर लिया और फिर भव्य समारोह के साथ द्वारका में विवाह संपन्न हुआ; यह प्रसंग दिव्य प्रेम, भक्ति और परमात्मा (कृष्ण) तथा आत्मा (रुक्मिणी) के मिलन का प्रतीक है, जिसमें श्रीकृष्ण ने रुक्मिणी के भाई रुक्मी को हराकर और सभी बाधाओं को पार कर उनसे विवाह किया था।
श्री व्यास ने कहा
रुक्मिणी का निश्चय: विदर्भ के राजा भीष्मक की पुत्री रुक्मिणी, श्रीकृष्ण की सुंदरता और गुणों से प्रभावित होकर उन्हें मन ही मन अपना पति मान चुकी थीं। उन्होंने बाल्यकाल से ही श्रीकृष्ण को अपने पति के रूप में स्वीकार किया था।
शिशुपाल से विवाह तय: रुक्मिणी के भाई रुक्मी, श्रीकृष्ण के शत्रु थे और अपनी बहन का विवाह चेदिराज शिशुपाल से कराना चाहते थे। रुक्मिणी इस निर्णय से दुखी थीं और उन्होंने अपनी सखी के माध्यम से श्रीकृष्ण को संदेश भेजा, जिसमें उन्होंने शिशुपाल से विवाह न होने पर प्राण त्यागने की बात कही।
👉🏻भागवत कथा में यजमान हेमराज पटेल पूरन यादव
कथा में पधारे मोजी लाल पटेल,संतोष ठाकुर, सत्य सिंह पटेल युवा नेता (मोनू) ,शिवराज पटेल (शिक्षक), अर्जुन पटेल ,भदई ठाकुर,कोमल पटेल,रामजी पटेल,आकाश,केशव पटेल,सतेंद्र पटेल
एवं सभी वरिष्ठ ग्रामीण जन माताएं बहनें कथा में सम्मिलित होकर कथा का पुण्य लाभ उठाया
Author: Sonupatel7
सच के पहले भी और बाद भी










